ज़िला
नक्शा नहीं फिर भी तीन मंजिला इमारत तैयार: नारनौल में CLC कोचिंग सेंटर पर सिस्टम की मिलीभगत या खुली लापरवाही
तीन मंजिला भवन खड़ा: नगर परिषद पर उठे सीधे सवाल
नारनौल में एक बार फिर अवैध निर्माण को लेकर सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अनधिकृत क्षेत्र में बने CLC कोचिंग सेंटर का तीन मंजिला भवन अब प्रशासनिक जांच के घेरे में है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब एरिया ही अनधिकृत बताया जा रहा है, तो नक्शा पास कैसे होता—और जब नक्शा पास नहीं हुआ, तो इतनी बड़ी इमारत आखिर खड़ी कैसे हो गई।
निर्माण के दौरान चुप्पी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद को इस निर्माण की जानकारी पहले ही दे दी गई थी। बताया जा रहा है कि नगर परिषद के ईओ जोगेंद्र सिंह को निर्माण के समय अवगत करवाया गया था और उन्होंने 5 दिन का समय मांगा था, लेकिन करीब एक महीना बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब जब इमारत पूरी बन चुकी है, तब नोटिस जारी होना प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है।
एसडीएम का निरीक्षण , दस्तावेज मांगे, सीलिंग की चेतावनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम अनिरुद्ध यादव खुद मौके पर पहुंचे और निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि नगर परिषद की ओर से नोटिस जारी किया जा चुका है और संबंधित पक्ष से जरूरी दस्तावेज मांगे गए हैं। यदि तय समय में दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते, तो भवन को सील करने की कार्रवाई की जाएगी।
एक परिसर में दो संस्थान
इस पूरे मामले में एक और बड़ा पहलू सामने आया है कि परिसर के मुख्य गेट पर CLC का बोर्ड लगा है, जबकि अंदर स्कूल और कोचिंग दोनों चलने की बात सामने आ रही है। CBSE के नियमों के अनुसार एक ही परिसर में इस तरह व्यावसायिक कोचिंग गतिविधियों की अनुमति नहीं होती, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।
कम उम्र के बच्चों को कोचिंग ?:
केंद्र सरकार की 2024 की गाइडलाइन के अनुसार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कोचिंग का प्रावधान नहीं है, लेकिन यहां इन नियमों की भी खुलेआम अनदेखी किए जाने के आरोप हैं। यदि जांच में यह सही पाया जाता है, तो संस्था के खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव है।
कार्रवाई या फिर फाइलों में दफन मामला ?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मामला केवल लापरवाही का है या इसके पीछे किसी स्तर पर मिलीभगत भी है। जब निर्माण हो रहा था तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और क्या इस बार जिम्मेदारी तय होगी—इन सवालों के जवाब अब प्रशासन को देने होंगे। नारनौल की जनता की नजर अब अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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