AJL प्लॉट केस में हुड्डा को राहत : पंचकूला CBI कोर्ट ने किया आरोपमुक्त : ₹65 करोड़ के प्लॉट आवंटन पर था विवाद : लंबे समय से चल रहा मामला खत्म
हरियाणा के पंचकूला में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को भूखंड आवंटन से जुड़े बहुचर्चित मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बड़ी राहत मिली है। CBI की विशेष अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया।
इस मामले में AJL के तत्कालीन चेयरमैन रहे मोतीलाल वोरा को भी आरोपमुक्त किया गया है। हालांकि उनका करीब छह वर्ष पहले निधन हो चुका है। वहीं 78 वर्षीय भूपेंद्र सिंह हुड्डा स्वयं अदालत में पेश हुए थे।
इससे पहले CBI की विशेष अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के खिलाफ हुड्डा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकल पीठ ने टिप्पणी की थी कि प्रथम दृष्टया आरोप सिद्ध नहीं होते और पर्याप्त आधार के बिना आपराधिक मुकदमा जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जा सकता है। इसके बाद आरोप तय करने के आदेशों को खारिज कर दिया गया था।
शुक्रवार को इसी मामले में CBI की विशेष अदालत में दोबारा सुनवाई हुई, जिसमें बचाव पक्ष के वकील द्वारा दलीलें रखी गईं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने हुड्डा और AJL के पूर्व चेयरमैन मोतीलाल वोरा को आरोपों से मुक्त कर दिया।
यह मामला पंचकूला के सेक्टर-6 में स्थित लगभग 3,360 वर्ग मीटर सरकारी भूखंड के आवंटन से संबंधित है। आरोप था कि यह प्लॉट, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹64.93 करोड़ बताई गई, उसे AJL को मात्र ₹69.39 लाख में आवंटित किया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, वर्ष 1982 में तत्कालीन सरकार के समय यह जमीन AJL को आवंटित की गई थी। बाद में वर्ष 1992 में यह कहते हुए प्लॉट वापस ले लिया गया कि निर्धारित समय में निर्माण कार्य नहीं किया गया। वर्ष 2005 में हरियाणा में सरकार बनने के बाद इस प्लॉट का पुनः आवंटन किया गया, जिसके बाद यह मामला विवादों में आया।
इस प्रकरण में हरियाणा विजिलेंस ने भी पूर्व मुख्यमंत्री सहित हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA) के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। बाद में जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई, जिसने 27 जनवरी 2017 को केस दर्ज कर जांच शुरू की और 1 दिसंबर 2018 को चार्जशीट दाखिल की।
हाईकोर्ट में वर्ष 2021 से 2025 के बीच इस मामले की सुनवाई पर रोक भी लगी रही। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब CBI अदालत के इस फैसले से पूर्व मुख्यमंत्री को बड़ी राहत मिली है।
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