14 किलो के सिलेंडर में 10 किलो गैस देने की तैयारी : कीमत भी घट सकती है

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मार्च के पहले हफ्ते में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 60 रुपए बढ़ी थी।
मार्च के पहले हफ्ते में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 60 रुपए बढ़ी थी। (Photo Source: GZNews.in)

 

नई दिल्ली, 23 मार्च। पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात और सप्लाई संकट के बीच सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) घरेलू LPG वितरण में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में हैं। योजना के तहत 14.2 किलो के सिलेंडर में 10 किलो गैस भरकर देने का प्रस्ताव है, ताकि सीमित स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुंचाया जा सके।

सप्लाई संकट से निपटने की रणनीति

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि खाड़ी देशों से LPG की सप्लाई प्रभावित हो रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के चलते आयात बाधित हुआ है, जिससे भारत में गैस की किल्लत बढ़ने की आशंका है।

कम गैस, कम कीमत का फॉर्मूला

अगर यह योजना लागू होती है, तो सिलेंडर की कीमत भी उसी अनुपात में घटाई जाएगी। फिलहाल दिल्ली में 14.2 किलो LPG सिलेंडर की कीमत ₹913 और मुंबई में ₹912.50 है। 10 किलो गैस मिलने पर उपभोक्ताओं को कम भुगतान करना होगा। नए सिलेंडरों की पहचान के लिए विशेष स्टिकर लगाया जाएगा।

एक महीने की जरूरत पूरी करने का दावा

तेल कंपनियों का मानना है कि 14.2 किलो का सिलेंडर औसतन 35-40 दिन चलता है। ऐसे में 10 किलो गैस से भी एक परिवार की जरूरत करीब एक महीने तक पूरी हो सकती है। इससे बची गैस को उन क्षेत्रों में भेजा जा सकेगा जहां सप्लाई प्रभावित है।

बॉटलिंग प्लांट्स में बदलाव की चुनौती

इस बदलाव को लागू करने के लिए बॉटलिंग प्लांट्स को अपने सिस्टम को दोबारा कैलिब्रेट करना होगा। साथ ही इसके लिए कई नियामकीय मंजूरियों की जरूरत होगी। अधिकारियों को आशंका है कि अचानक बदलाव से लोगों में भ्रम या विरोध की स्थिति भी बन सकती है।

सप्लाई की स्थिति चिंताजनक

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश की LPG सप्लाई फिलहाल ‘चिंताजनक’ स्थिति में है। भारत अपनी करीब 60% LPG जरूरत आयात करता है, जिसमें से 90% हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।

फिलहाल 6 गैस टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और होर्मुज रूट खुलने का इंतजार कर रहे हैं।

संकट की दो बड़ी वजहें

1. कतर का रास लफ्फान प्लांट बंद
ईरान के हमलों में कतर के रास लफ्फान LNG प्लांट को नुकसान पहुंचा है, जो वैश्विक सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा देता है। इसके बंद होने से सप्लाई प्रभावित हुई है।

2. होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा
करीब 167 किमी लंबा यह समुद्री मार्ग दुनिया के 20% पेट्रोलियम ट्रांसपोर्ट का मुख्य रास्ता है। युद्ध के कारण यह रूट असुरक्षित हो गया है, जिससे तेल और गैस की आवाजाही प्रभावित हुई है।

सरकार के अब तक के बड़े फैसले

  • 6 मार्च: सिलेंडर बुकिंग के लिए 21 दिन का लॉक-इन पीरियड लागू
  • 9 मार्च: शहरी क्षेत्रों में इसे बढ़ाकर 25 दिन किया गया
  • 12 मार्च: ग्रामीण इलाकों में बुकिंग गैप 45 दिन किया गया
  • 14 मार्च: PNG यूजर्स के लिए LPG सिलेंडर रखना गैर-कानूनी घोषित

देश पर असर कम करने की कोशिश

सरकार और तेल कंपनियां लगातार इस प्रयास में हैं कि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर भारत में कम से कम हो। इसके लिए आयात स्रोतों में विविधता, स्टोरेज बढ़ाने और सप्लाई मैनेजमेंट पर फोकस किया जा रहा है।

 

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