पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी का बयान: होर्मुज का रास्ता रोकना नामंजूर, नागरिक ठिकानों पर हमलों का विरोध

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पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया जंग को लेकर पहली बार संसद में बयान दिया।
पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया जंग को लेकर पहली बार संसद में बयान दिया। (Photo Source: GZNews.in)

नई दिल्ली, 23 मार्च। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार लोकसभा में विस्तार से बयान दिया। करीब 25 मिनट के संबोधन में उन्होंने साफ कहा कि तनाव खत्म होना चाहिए और बातचीत ही इस संकट का एकमात्र समाधान है।


नागरिक और ऊर्जा ठिकानों पर हमले अस्वीकार्य

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि नागरिकों, पावर प्लांट और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्ग को रोकना पूरी तरह नामंजूर है।


41 देशों से तेल-गैस आयात, सप्लाई सुनिश्चित करने की कोशिश

मोदी ने बताया कि सरकार देश में तेल और गैस की कमी न हो, इसके लिए लगातार प्रयास कर रही है। पहले जहां भारत 27 देशों से आयात करता था, अब यह संख्या बढ़ाकर 41 कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी सप्लायर देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।


रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बढ़ाने पर जोर

प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत ने पिछले एक दशक में संकट से निपटने के लिए कच्चे तेल के भंडारण पर विशेष ध्यान दिया है। वर्तमान में देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार है, जिसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन करने की योजना पर काम चल रहा है।


भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में करीब एक करोड़ भारतीय रह रहे हैं और उनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब तक 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं, जिनमें ईरान से लौटे करीब हजार लोग शामिल हैं। इनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र भी हैं।


बिजली और खाद्य आपूर्ति पर भी नजर

प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध के बीच देश में बिजली की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद है। साथ ही, देश में खाद्यान्न की भी कोई कमी नहीं है और आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।


एनर्जी सेक्टर पर विशेष निगरानी, रोजाना समीक्षा

उन्होंने बताया कि ऊर्जा क्षेत्र अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और पश्चिम एशिया इसका प्रमुख स्रोत है। भारत सरकार ने एक विशेष समूह का गठन किया है, जो रोजाना बैठक कर आयात-निर्यात से जुड़ी समस्याओं पर नजर रख रहा है।


कूटनीति के जरिए समाधान पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की कूटनीतिक भूमिका स्पष्ट है। उन्होंने पश्चिम एशिया के कई नेताओं से बातचीत कर तनाव कम करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कॉमर्शियल जहाजों पर हमले और बाधाएं अस्वीकार्य हैं और सभी पक्षों को शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

 

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