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क्षांत समारोह में महान शिक्षाविद् का सान्निध्य: प्रो. अजमेर सिंह काजल मुख्य अतिथि | विद्यार्थियों को मिला प्रेरणादायक मार्गदर्शन | शिक्षा व शोध में योगदान की सराहना
राजकीय महाविद्यालय नारनौल में आयोजित दीक्षांत समारोह के पावन अवसर पर विद्यार्थियों को महान शिक्षाविद् एवं प्रेरणादायक व्यक्तित्व प्रोफेसर डॉ. अजमेर सिंह काजल का सान्निध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में वे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर राजवीर सिंह ने इस अवसर को संस्थान के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे विद्वान व्यक्तित्व का मार्गदर्शन मिलना विद्यार्थियों के लिए सौभाग्य की बात है।
प्रो. अजमेर सिंह काजल वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। वे एक प्रख्यात विद्वान, चिंतक, शिक्षाविद् और समाज-सुधारक के रूप में जाने जाते हैं, जिनका हिंदी साहित्य और समाज पर महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है।
उनका जन्म 15 जनवरी 1967 को हुआ। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. व एम.फिल. तथा महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से वर्ष 1996 में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने एलएलबी और जनसंचार में भी उच्च शिक्षा हासिल कर अपने ज्ञान के क्षेत्र को विस्तृत किया।
प्रो. काजल का शैक्षणिक जीवन अत्यंत प्रेरणादायक रहा है। सहायक प्राध्यापक से लेकर प्रोफेसर तक का सफर उन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण से तय किया। उनका विशेष योगदान हिंदी कथा साहित्य और दलित साहित्य आलोचना के क्षेत्र में रहा है। उन्होंने अपने शोध के माध्यम से वंचित और उपेक्षित वर्गों की आवाज को सशक्त अभिव्यक्ति दी है।
वे एक उत्कृष्ट लेखक भी हैं और उनकी कई महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें “दलित आत्मकथाएं: वेदना, विद्रोह और सांस्कृतिक रूपांतरण”, “उपन्यासकार राजेंद्र यादव” और “दलित चिंतन के आयाम” विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसके अलावा उनके 40 से अधिक शोध-पत्र राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
उन्होंने अनेक शोधार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए 5 पीएच.डी. और 8 एम.फिल. विद्यार्थियों को शोध की दिशा प्रदान की है। साथ ही देश-विदेश में विभिन्न सेमिनारों व व्याख्यानों के माध्यम से शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रेस प्रवक्ता डॉ. चंद्रमोहन और कुलसचिव डॉ. सत्य पाल सुलोदिया ने भी उनके योगदान की सराहना की। अपने संबोधन में प्रो. काजल ने आश्वासन दिया कि महाविद्यालय या जिला महेंद्रगढ़ से संबंधित किसी भी विद्यार्थी या अभिभावक को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से जुड़े कार्यों में प्राथमिकता दी जाएगी।
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