नारनौल में 78 करोड़ का बिजली बिल : 8 दिन में 80 करोड़ पार होने की चेतावनी , विभाग ने मानी गड़बड़ी, जांच शुरू
हरियाणा के नारनौल से सामने आया एक चौंकाने वाला मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) द्वारा यूथ कांग्रेस जिला अध्यक्ष पुनीत बुलान को भेजा गया 78 करोड़ 92 लाख 75 हजार 697 रुपए का बिजली बिल न केवल स्थानीय स्तर पर हैरानी का कारण बना है, बल्कि देशभर में बिजली बिलिंग प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।
78 करोड़ का बिजली बिल, नारनौल में हड़कंप
नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र के गांव हसनपुर से सूखने वाला मामला सामने आया है बिल में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि 8 अप्रैल तक भुगतान नहीं किया गया, तो देय राशि बढ़कर 80 करोड़ 7 लाख 35 हजार 635 रुपए हो जाएगी। यानी तय तिथि के बाद भुगतान करने पर 1 करोड़ 14 लाख 59 हजार 938 रुपए अतिरिक्त देने पड़ेंगे।
दिन में 80 करोड़ पार, बिल में चौंकाने वाली शर्त
इस मामले ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आमतौर पर जहां उपभोक्ता छोटे-छोटे बिलों की त्रुटियों को सुधारने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं, वहीं करोड़ों रुपए का इस प्रकार का बिल सामने आना सिस्टम की बड़ी खामी की ओर इशारा करता है।
DHBVN की बिलिंग पर बड़े सवाल
यूथ कांग्रेस जिला अध्यक्ष पुनीत बुलान ने इस प्रकरण को लेकर कहा कि यह या तो भाजपा सरकार की नाकामी है या फिर बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के मामलों के माध्यम से विपक्षी नेताओं को परेशान करने का प्रयास किया जा रहा है।
विभाग बोला—गड़बड़ी की जांच जारी
बिजली विभाग के कार्यकारी अभियंता शिवराज सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और बिल में हुई गड़बड़ी को ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट होने के बाद आवश्यक सुधार किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल बिलिंग सिस्टम में यदि इस स्तर की त्रुटि संभव है, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि व्यापक सुधार की आवश्यकता का संकेत है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि बिजली विभाग अपनी बिलिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करे और जिम्मेदारी तय करे।
फिलहाल विभाग की ओर से कार्रवाई जारी है, लेकिन यह मामला अब केवल नारनौल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर में बिजली व्यवस्था की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवाल बन गया है।
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